 Reyaz-ul-haque |
| Blog | Posted By: hindtodaynews on:7/29/2012 9:37:28 PM |
कबीर कला मंच उस जनता का सांस्कृतिक चेहरा है जिससे भाषा छीन ली
गई, संस्कृति से बेदखल कर दिया गया, जमीन और आजीविका के साधन छीन लिए गए और
सदियों की गुलामी में धकेल दिया गया. इसीलिए जब इस दलित, पिछड़े,
अल्पसंख्यक तबके के लोग अपने अधिकारों की आवाज को बुलंद करते हैं तो उनको
फर्जी मुठभेड़ों में मार दिया जाता है, गिरफ्तार कर वे जेल में डाल दिए
जाते हैं. उनके गीतों को भी खामोश करने की कोशिश की जाती है. लेकिन वे गीत
हैं कि जेल की दीवारों को पार कर दुनिया में बज उठते हैं. पुलिस के दमन की
वजह से भूमिगत हुई दलित कलाकारों की सांस्कृतिक संस्था कबीर कला मंच के
गिरफ्तार किए गए सदस्यों में से एक दीपक डेंगले ने इस गीत को जेल में लिखा है और इसे गाया है सागर गोरखे ने. हमारे बीच में इस गीत को पहुंचाया है कबीर कला मंच बचाव समिति ने.

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